January 16, 2026

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जहां से पढ़कर बने डीएम, अब उस स्कूल की सूरत बदलेंगे ये IAS अधिकारी

आपने लोगों को अक्सर ये कहते सुना होगा कि अगर कोई शख्स जिंदगी में कुछ बन जाता है या किसी अच्छे मुकाम पर पहुंच जाता है तो वह अपनों को भी भूल जाता है. लेकिन फर्रुखाबाद के जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह अपने पैतृक गांव और अपने स्कूल को नहीं भूले हैं. यही वजह है कि उन्होंने अपने पैतृक गांव के प्राथमिक स्कूल को गोद लिया है. इसके साथ ही स्कूल के कायाकल्प कराने का निर्णय लिया है. इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी औरैया को पत्र भी भेजा है.

स्वतंत्रता सेनानी दिवंगत गजेन्द्र सिंह के सबसे छोटे बेटे हैं मानवेन्द्

फर्रूखाबाद के जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह औरैया जिले के मूल निवासी हैं. यहां बिधूना तहसील के नूरपुर खरगपुर ग्राम पंचायत के अंर्तगत आने वाला तिलकपुर फार्म उनका पैतृक गांव है. मानवेन्द्र सिंह स्वतंत्रता सेनानी बिधूना क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे दिवंगत गजेन्द्र सिंह के सबसे छोटे बेटे हैं. उन्होंने प्राइमरी तक की पढ़ाई यहीं के प्राथमिक विद्यालय से की है. लेकिन इतने सालों बाद भी स्कूल का कायाकल्प नहीं हुआ है. ऐसे में उन्होंने अपने स्कूल का 6 महीने के अंदर कायाकल्प कराने का निर्णय का लिया है.

डीएम औरेया को लिखा लेटर

मानवेन्द्र सिंह ने जिलाधिकारी औरैया सुनील कुमार वर्मा को इससे संबंधित एक लेटर भी भेजा है. जिसमें उन्होंने लिखा है,” मुख्यमंत्री की अपील से प्रेरित होकर अपने निवास (तिलकपुर फार्म) की मूल ग्राम पंचायत नूरपुर खरगपुर जहां का मैं रहने वाला हूं, वहां संचालित प्राथमिक विद्यालय को गोद लेना चाहता हूं, जिसका अभी तक कायाकल्प नहीं हुआ है. अब इस प्राथमिक विद्यालय के कायाकल्प की जिम्मेदारी मेरी है. जिसका मैं आगामी छह माह में कायाकल्प करके राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहता हूं. वहीं, इस लेटर के अंत में उन्होंने जिलाधिकारी औरैया को इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने के लिए कहा है.

बच्चों की शिक्षा पर देते हैं जोर

बता दें कि डीएम मानवेन्द्र सिंह अपने जिले फर्रूखाबाद में भी बेसिक शिक्षा को लेकर खासे गंभीर रहते हैं. उन्होंने यहां के परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प कराया है. यहां के परिषदीय स्कूल भी किसी कॉनवेंट स्कूल से कम नहीं हैं. वह बच्चों की शिक्षा पर भी जोर देते हैं. समय-समय पर इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित भी करते हैं.

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