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जी.एन.आइ.ओ.टी एम् बी ए इंस्टिट्यूट मे “ह्यूमन राइट्स इन्क्लूसिओंन एम्पावरमेंट” परिचर्चा का आयोजन।


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आज दिनांक 24 सितम्बर 2021 को जी.एन.आइ.ओ.टी एम् बी ए इंस्टिट्यूट मे “ह्यूमन राइट्स इन्क्लूसिओंन एम्पावरमेंट” पैनल चर्चा का आयोजन किया गया।


सभी गणमान्य उपस्थित व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह में भाग लिया और माता सरस्वती की वंदना की


परिचर्चा का शुभारम्भ डायरेक्टर एम् बी ए डॉ. सविता मोहन ने सभी आये हुए सभी वक्ताओं का स्वागत स्मृतिचिन्ह भेट कर किया।उन्होंने कहा इस सत्र का उद्देश्य छात्रों को मानव अधिकारों की अवधारणा और बुनियादी मानवाधिकारों की जागरूकता और समझ में अंतर्दृष्टि प्राप्त करना है।जब लोगों के साथ दुर्व्यवहार या भ्रष्टाचार होता है, तो मानवाधिकार की अवधारणा उन्हें बोलने का अधिकार, व्यक्त करने का अधिकार, विरोध करने का अधिकार की अनुमति देती है, साथ ही उन्होंने फ्रेडेरिक डॉग्लस के द्वारा कहा गया वन्क्तव्य “नॉलेज मैक्स ए मैन अनफिट टू बी ए स्लेव “के द्वारा मानवधिकार द्वारा निडर होने की बात कही।
आज की परिचर्चा का सञ्चालन करते हुए एम् बी ए की प्रोफ एस एस गुप्ता, ने कहा कि साक्षरता निराशा और आशा के बीच एक कड़ी का काम करती है। यह आधुनिक समाज के दैनिक जीवन के लिए एक उपकरण है, चाहे वह वित्तीय, डिजिटल या कानूनी साक्षरता हो।


आज के पहले वक्ता एडवोकेट विनीत नागर सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया में अभ्यास कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि जब लोगों के साथ दुर्व्यवहार या भ्रष्टाचार होता है, तो मानवाधिकार की अवधारणा उन्हें बोलने का अधिकार, व्यक्त करने का अधिकार, विरोध करने का अधिकार की अनुमति देती है। चूंकि कोई भी समाज निर्दोष नहीं है, इसलिए इन विशिष्ट अधिकारों जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार, समान कार्य अवसरों का अधिकार आदि का ज्ञान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।उन्होंने क्रिमिनल एक्ट का मूल्याङ्कन मानवाधिकार कि भलाई के लिए कैसे किया जाता है के बारे मे महत्वपूर्ण जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया मे कार्यरत एडवोकेट ममता शर्मा ने कहा कि जब लोग मानवाधिकार की अवधारणा से जागरूक और सशक्त होते हैं, जो उन्हें बताती है कि वे समाज से गरिमा के हकदार हैं, चाहे वह सरकार हो या उनका कार्यस्थल। केवल अगर उन्हें अच्छी तरह से सूचित किया जाता है तो केवल उनके पास खड़े होने और आवाज उठाने का विकल्प होता है कि वे इसे प्राप्त नहीं करते हैं। उन्होंने महिला उत्पीड़न एवं रॉन्ग प्रॉसिक्यूशन कंपनसेशन के प्रमुख केसेस के बारे मे जानकारी दी।


सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया द्वारा दिल्ली विकास प्राधिकरण एडवोकेट क्षितिज आहूजा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि शिक्षा में शांति और मानव अधिकारों के साथ-साथ मानव अधिकारों और समाज और उसके नागरिकों की भलाई के लिए सशक्तिकरण का अध्ययन शामिल है।
एडवोकेट दिव्य ज्योति सिंह एओआर सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने भारत के संविधान के बारे मे विस्तार से बताया, उन्होंने कहा कि हमे ह्यूमन राइट्स कि जानकारी न होने के कारण उस अधिकार से वंचित रह जाते है , ह्यूमन राइट्स को आजादी से लेकर अब तक हम इसकी ताकत को समझना होगा तभी हम सभी का जीवन खुशहाल होगा।
परिचर्चा के अंत मे हेड एम् बी ए डॉ अविजित डे ने आये हुए सभी अधिवक्ताओ का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके द्वारा दिए ज्ञान को पाकर हम सभी अपने अधिकार और सच्चाई के लिए उपयोग कर सकते है।

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