February 17, 2026

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जी एन आई ओ टी इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के द्वारा” सिग्नीफिकेन्स ऑफ गीता इन नॉलेज बेस्ड इकोनामी” विषय पर पैनल डिस्कशन का आयोजन।

आज दिनांक 9 दिसम्बर 2022 को जी एन आई ओ टी इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के सोशल क्लब “प्रयास” द्वारा गीता परिवार एवं जी आई फोर क्यू सी फोरम के सहयोग से ” सिग्नीफिकेन्स ऑफ गीता इन नॉलेज बेस्ड इकोनामी” विषय पर पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया

 

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।
प्रिंसिपल, जीआईपीएस डॉ सविता मोहन ने सभी आये पैनलिस्ट का स्वागत करते हुए कहा कि श्री श्रीमद्भगवत गीता को हिंदू धर्म में बहुत खास स्थान दिया गया है गीता अपने अंदर भगवान कृष्ण के उद्देश्यों को समेटे हुए हैं गीता को आम संस्कृत भाषा में लिखा गया है संस्कृत की आम जानकारी रखने वाला भी गीता को आसानी से पढ़ सकता है गीता को वेदों और उपनिषदों का सार माना जाता है l इस सांसारिक दुनिया में दुख क्रोध अहंकार ईशा आदि से पीड़ित आत्माओं को गीता सत्य और अध्यात्म का मार्ग दिखा कर मोक्ष की प्राप्ति करवाती है

पैनल के प्रथम पैनलिस्ट फॉर्मर वाईस चांसलर ,यू पी टी यू लखनऊ एवं प्रेसिडेंट आर & डी, इंडिया गिलाईकोल्स लिमिटेड प्रोफेसर(डॉ) आर के खंडाल जी ने संस्कृत भाषा पर जोर दिया उन्होंने कहा हमें अपनी मर्यादाओं को केंद्रित करते रहना है और मर्यादा से सामर्थ्य आता है और सामर्थ्य से कीर्तिमान बनता है उन्होंने ज्ञान और कर्म, शुभ और लाभ के बारे में विस्तृत जानकारी देकर गीता की महत्ता पर प्रकाश डाला l
द्वितीय पैनलिस्ट फाउंडर क्रेस्कोन कोचेस अनीश रखेजा ने गीता के बारे में ज्ञान देते हुए कहा कि शब्द, उपनिषद और श्लोक को हम अपने जीवन मैं कैसे उसका उपयोग करेंगे उन्होंने कहा कि जो लोग पूरे विश्वास के साथ अपने लक्ष्य को पाने का प्रयास करते हैं वह निश्चय ही अपने लक्ष्य को पा लेते हैं लेकिन मनुष्य को अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार चिंतन एवं प्रयास करते रहना चाहिए
आज के प्रोग्राम के मॉडरेटर रहे सी इ ओ, फार्म एंड फुल पोटेंशियल आनंद प्रकाश जी ने गीता को बहुमूल्य मानते हुए छात्रों से श्रीमद्भगवत गीता से प्रश्न पूछे, हमारे छात्रों द्वारा उत्तर पाकर उन्होंने छात्रों को आशीर्वाद दिया, उन्होंने बताया कि जब हमारा मन कमजोर होता है परिस्थितियां समस्या बन जाती हैं और जब मन स्थिर होता है तब परिस्थितियां चुनौती बन जाती हैं लेकिन जब मन मजबूत होता है तो परिस्थितियां सुअवसर बन जाती हैं
ग्रुप के लाइब्रेरी हेड श्री एस डी नौटियाल जी ने भी आज के पैनल चर्चा में भाग लिया उन्होंने कहा कि गीता के द्वारा श्रीकृष्ण ने निर्देश दिया है कि हर मनुष्य को खुद पर पूरा भरोसा रखना चाहिए क्योंकि जो लोग खुद पर भरोसा करते हैं वह निश्चय ही सफलता हासिल कर पाते हैं श्रीकृष्ण,अर्जुन से कहते हैं कि व्यक्ति कर्म करने के लिए ही पैदा हुआ है और बिना कर्म किये कोई रह नहीं सकता। फल की चिंता करना व्यर्थ है क्योंकि इससे मनुष्य का मन काम से भटकने लगता है। जो कर्मफल से विरक्त होकर कर्म करता जाता है, उसका आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ता जाता है।
पैनल चर्चा के समापन पर हेड बी बी ए डॉ हिमांशु मित्तल ने सभी पैनलिस्ट, शिक्षक एवं छात्रों का धन्यवाद किया एवं कहा कि आज पैनलिस्ट द्वारा दिए गए ज्ञान को यदि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में पालन कर पाता है तो निश्चय ही वह एक सफल व्यक्ति बन सकता है

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