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40 लाख के प्लॉट का सपना दिखाकर लाखों हड़पने का आरोप,दिल्ली पुलिस का रिटायर्ड दरोगा न्याय के लिए भटकने को मजबूर,पीड़ित ने मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह करने की दी चेतावनी।

संवाददाता जे एस सिसोदिया

ग्रेटर नोएडा।ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में प्लॉट खरीदने का सपना देखने वाले दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त दरोगा रोहतास सिंह वोहरा आज अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। वर्षों तक पुलिस-प्रशासन और सरकार के सामने अपनी फरियाद रखने के बावजूद न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पीड़ित बुधवार को सेक्टर अल्फा-1 स्थित प्रेस क्लब भारत पहुंचा। जहाँ पत्रकारों के साथ प्रेस वार्ता कर अपनी आपबीती सुनाई और तेवतिया रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अजीम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया।

दरअसल, रोहतास सिंह के मुताबिक, वर्ष 2018 में उन्होंने शाहबेरी स्थित तेवतिया सिटी, सेक्टर-16बी में खसरा संख्या 302 पर करीब 400 वर्ग गज का प्लॉट खरीदने के लिए 40 लाख रुपये में सौदा तय किया था। उनका दावा है कि उन्होंने 6 फरवरी 2018 को 10 लाख और 7 फरवरी को 20 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए। इसके अतिरिक्त 6 लाख 35 हजार रुपये नकद दिए। इस तरह कुल 36.35 लाख रुपये का भुगतान करने के बावजूद उन्हें न प्लॉट मिला और न ही पूरी रकम वापस हुई।

पीड़ित का कहना है कि उन्हें जून 2018 में रजिस्ट्री कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन हर बार कोई न कोई कारण बताकर मामला टाल दिया गया। आरोप है कि 23 अप्रैल 2019 को जब वह शेष भुगतान लेकर पहुंचे, तो प्लॉट की कीमत दोगुनी होने की बात कही गई। विरोध करने पर कथित रूप से धमकी दी गई। रोहतास सिंह के अनुसार, बाद में उनके खाते में पांच लाख रुपये लौटाए गए और बाकी रकम छह महीने में देने का वादा किया गया, लेकिन शेष पैसा आज तक नहीं मिला।

रोहतास सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका दावा है कि संबंधित प्लॉट किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया और वहां कॉलोनी भी विकसित हो चुकी है। इस संघर्ष के बीच 3 मार्च 2026 को उनकी पत्नी का निधन हो गया, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गईं।

प्रेस वार्ता में पीड़ित ने कहा कि वर्षों की भागदौड़ के बाद अब उन्हें पुलिस-प्रशासन और सरकार से भी न्याय की उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह करने की चेतावनी देते हुए अपनी रकम वापस दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। अब सवाल यह है कि बैंक के माध्यम से किए गए भुगतान और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी और पीड़ित को न्याय कब मिलेगा।

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